जानिये, आखिर क्यों किन्नरों के घर पर या उनके हाथों से बना खाना कर देना चाहिए नजरअंदाज।

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हिंदू शास्त्रों के अनुसार, कहा जाता है कि किन्नरों के घर का खाना नहीं खाना चाहिए। 

जिस तरह भगवान ने इस धरती पर स्त्री और पुरुष बनाया है उसी तरह हमलोग जैसे ही एक और रचना है जो न तो स्त्री और न ही पुरुष वर्ग में आते है। इसे हमारे समाज में किन्नर के नाम से जाना जाता है। वैसे तो हमारे समाज में अभी तक स्त्री के अधिकारों और उसके अस्तित्व को लेकर लड़ाई जारी है तो ऐसे समाज में किन्नर को एक मानव होने के अधिकार और सम्मानपूर्वक जगह देने की बात करनी बेईमानी होगी।

लेकिन, फिर भी देर-सवेर इन लोगो ने अपने अधिकारों के लिए आवाज उठानी बुलंद कर दी है जिससे सरकार का ध्यान भी इस तरफ गया है और इसी के चलते अब तमाम सरकारी भर्तियों में लिंग के वर्ग में इन्हे भी स्थान दिया गया है। आपको बता दें, किन्नर समुदाय की दुनिया हमारे समाज के सभी धर्मो से अलग होता है जो बहुत काम लोग ही जानते है। हिंदू शास्‍त्रों पर गौर करें तो, ऐसा कहा जाता है कि किन्‍नरों के घर का खाना नहीं खाना चाहिए।

ऐसा माना जाता है कि इनके हाथ का बना खाना खाने वाला व्‍यक्‍ित पाप का भागी होता है। सिर्फ यही नहीं, इनसे जुड़ी ऐसी कई बाते हैं जिनपर विश्‍वास कर पाना थोड़ा मुश्‍किल है। लेकिन, ये सच है। तो आइये जानते हैं हिंदू शास्‍त्र के अनुसार किन-किन लोगों के हाथों का खाना वर्जित है। भारतीय संस्‍कृति और ग्रंथों पर गौर करें तो समाज में किन्‍नरों को काफी शुभ माना जाता है। यही कारण है कि हर अच्‍छा या बुरा व्‍यक्‍ित किन्‍नरों को कुछ न कुछ दान देता रहता है। इनको दान देना काफी शुभ माना जाता है।

ऐसे में अब जब किन्‍नरों को हर छोटा-बड़ा व्‍यक्‍ित दान देता रहता है, तो ये पता लगा पाना मुश्‍किल होता है कि उनके घर पर कौन सा खाना किसके घर से आई दान की वस्‍तु से बना है। यही कारण है कि किन्नरों के घर पर भोजन करना पूरी तरह से निषेध माना गया है। कहा जाता है कि जो व्यक्ति जैसा खाता है उसके विचार वैसे ही बन जाते हैं। इसका मतलब ये है कि जिसके हाथ का खाना खाया जाता है, उसकी प्रवृत्‍ति भी वैसी ही बन जाती है। साथ ही ये भी कहा जाता है कि अक्‍सर अमानवीय व्‍यवहार करने वाले व्‍यक्‍ति के घर खाना खाना तो दूर, उसके यहां प्रवेश करना भी वर्जित होना चाहिए।